सर्दी वाले प्रदूषण से खुद को कैसे बचाये | Winter Health care

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सर्दियों में हवा धुएं और कोहरे से भारी हो जाती है और इसमें पॉल्यूशन घुल जाता है , जो हवा को जहरीला बना देता है । इससे लोगों का दम फूलने लगता है और आंखों में जलन हो जाती है , इसकी वजह स्मॉग है । स्मॉग शब्द स्मोक और फॉग से मिल कर बना है । यानी धुएं और धुंध के मिलने से जो प्रदूषण पैदा होता है , वही स्मॉग है । स्मॉग पीले या काले रंग का कोहरा होता है , जो खराब माहौल में दूषित कणों के घुलने से बनता है । यह इंडस्ट्रियल धुएं और कचरा जलाने से होता है , ‘ खराब धुएं की कमी नहीं है , उस पर पेड़ – पौधे भी बहुत कम हैं , जिससे ऑक्सीजन का संतुलन बिगड़ जाता है ।

उस पर हेवी ट्रैफिक , पेट्रोल – डीजल का धुआं , बिगड़ा तापमान स्मॉग को बढ़ाता है यह ना सिर्फ लोगों बल्कि प्रकृति को भी प्रभावित करता है । इसकी वजह से जहरीली हवा का स्तर इतना बढ़ जाता है कि सांस लेने में दिक्कत , आंखों और गले में जलन हो जाती है । इसका एक उपाय है कि बाहर जाते समय मास्क पहना जाए।

प्रदूषण से खुद को कैसे बचाये – Healthy Body Care Tips In Winter- 

लेकिन घर के अंदर जब वेंटिलेशन की सही व्यवस्था नहीं होती , तापमान सही नहीं रहता और सीलन होती है , तो प्रदूषण पैदा हो जाता है ।

घर के अंदर पॉल्यूशन रोकने के लिए पूजा करते समय अगरबत्ती ना जलाएं । इससे निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड व नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैस बहुत नुकसानदायक होती हैं । इससे अस्थमा व श्वास संबंधी समस्या हो सकती हैं ।

जाड़ों के मौसम में घर के खिड़की – दरवाजे हर वक्त बंद ना रखें । खिड़कियां खोल कर हवा के क्रॉस वेंटिलेशन का प्रबंध करें ।

वैक्यूम क्लीनर में ब्लोअर का रोज इस्तेमाल ना करें , क्योंकि उससे धूल और कीटाणु घर की हवा में मिल जाते हैं । जो सांस के जरिए शरीर में पहुंच कर परेशानियां पैदा करते हैं । जिन घरों के वैक्यूम क्लीनर में ब्लोअर का इस्तेमाल ज्यादा होता है , वहां बीट्यूलिज्म नामक बैक्टीरिया वातावरण में घुल कर उसे प्रदूषित कर देता है । ब्लोअर का महीने या 15 दिनों के अंतराल में इस्तेमाल करें ।

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घर में टॉयलेट क्लीनर , फ्लोर क्लीनर और अन्य तरह के क्लीनर के रासायनिक प्रभावों की वजह से आंखों और त्वचा में जलन के अलावा गुर्दे और फेफड़ों से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं । इनका इस्तेमाल सावधानी से करके इनके खराब असर से बचा जा सकता है । महीने में एक बार रसोई की चिमनी की सफाई अवश्य करें या कराएं । लंबे समय तक चिमनी की सफाई ना होने पर चिमनी के फिल्टर में धुआं और तेल जम जाता है । तब चिमनी धुआं बाहर फेंकने के बजाय किचन में वापस फेंकती है ।

खराब माहौल से बचने के लिए लोग घर में एअर फ्रेशनर लगा रहे हैं , पर इससे कइयों को एलर्जी होती है । चूंकि इसमें फॉर्मल्डिहाइड जैसे हानिकारक रसायनों की मात्रा उच्च मात्रा पायी जाती है । इसकी वजह से नर्वस सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है । श्वास संबंधी परेशानियां भी हो जाती हैं । चूंकि प्रदूषण सबसे ज्यादा फेफड़ों पर असर डालता है , इसलिए इन्हें मजबूत बनाए रखें । इम्यून सिस्टम अच्छी जीवनशैली व खानपान से सुधर जाता है । रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने पर श्वास संबंधी समस्याएं कंट्रोल में रहती हैं ।

रोज व्यायाम करने , पैदल चलने , साइकिलिंग या गार्डनिंग करने से फेफड़े मजबूत होते हैं । शरीर पर प्रदूषण का असर कम होता है ।

प्रतिदिन लहसुन नहीं खा सकते , तो हफ्ते में कम से कम 2 बार लहसुन की कच्ची कलियां खाएं , सेहत अच्छी रहेगी । फेफड़े संबंधी रोगों व कैंसर का खतरा कम होता है ।

बीमारी से खुद को कि ऐसे बचाये-

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विटामिन सी में एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं , जो हवा में मौजूद प्रदूषण के असर को कम करते हैं । खट्टे फलों व हरी सब्जियों में विटामिन सी खूब होता है । अंगूर , आंवला , अनन्नास नियमित लेने से फेफड़े जहरीले तत्वों से मुक्त होते हैं ।

जंक फूड को अपने आहार से विदा करें और फलों को शामिल करें । फल खाने से दमा नियंत्रण में रहता है । जिनको फेफड़ों की समस्या है वे रोज सेब खाएं । सेब खाने से फेफड़े मजबूत होते हैं । सांस लेना सुगम होता है । सेब में मौजूद तत्व सांस की नलियों को खोलते हैं ।

ब्रोकली का निचला हिस्सा यानी तना चबाने से फेफड़े स्वस्थ रहते हैं । ब्रोकली में मौजूद सल्फोराफेन शरीर से बेंजीन नामक कैंसर तत्व को बाहर कर देता है । ब्रोकली का सूप फेफड़ों के लिए बहुत अच्छा रहता है ।

रोज प्राणायाम करें । इसमें अनुलोम – विलोम , नाड़ीशोधन , भस्त्रिका , भ्रामरी आसन अवश्य करें । फेफड़ों में जमा प्रदूषण सांस के जरिए बाहर निकल जाएगा ।

अदरक की चाय पिएं । इसमें दूध ना डालें । सुबह उठते ही अदरक की चाय पिएं और शाम को भी बिना दूधवाली रक की चाय पिएं । सांस की नलियों में जमा प्रदूषण इससे बाहर निकल जाएगा ।

कई इंडोर प्लांट ऐसे हैं , जो अपनी हवा से माहौल को प्रदूषण मुक्त करते हैं । इसके लिए आप रबर प्लांट , पीस लिली , एरिका पाम घर के अंदर लगा घर भी सजा रहेगा और आपके घर की हवा भी साफ रहेगी |

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रोज थोड़ा सा गुड़ जरूर खाएं । इससे फेफड़ों में मौजूद प्रदूषित कण को साफ करने में काफी मदद मिलती है । इसके अलावा हल्दी और शहद का भी सेवन करें । एक कप पानी में एक चौथाई चम्मच हल्दी उबाल कर इसमें आधा चम्मच शहद मिला कर रोज सुबह पिएं । इम्यून सिस्टम मजबूत होगा ।

पीपली का काढ़ा रोज पिएं । इसके लिए एक गिलास पानी में चुटकीभर पीपली पाउडर , चुटकीभर दालचीनी , चुटकीभर हल्दी पाउडर और थोड़ी सोंठ डाल कर उबालें । पानी आधा रह जाने पर उसमें आधा छोटा चम्मच शहद मिला कर पिएं ।

प्रदूषण से बंद नाक व छाती को खोलने के लिए यूकेलिप्टिस के तेल का भपारा लें । इसके लिए खौलते पानी में यूकेलिप्टिस तेल की 3-4 बूंदें डाल कर भाप लें । घर में रोज कपूर जलाने से हवा में मौजूद दूषित तत्व समाप्त होते हैं ।

तो यह रही कुछ ख़ास विंटर के समाये बरते जनि वाली सावधानिया जिनका आप को ख्याल रखना है मैं उम्मीद करती हु की आप को हमारा आज का यह पसंद आया होगा आप को यह आर्टिकल कैसे लगा मुझे कमेंट में ज़रूर बताये| 

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