अनचाही प्रेगनेंसी की परेशानी से बचने के लिए सुझाव – Unwanted Pregnancy Medicine – Khoobsurat World

अनचाही प्रेगनेंसी की परेशानी से बचने के लिए सुझाव – Unwanted Pregnancy Medicine

unwanted pregnancy tablets

Unwanted Pregnancy/Contraceptive pills:

लड़कियों और महिलाओं की जिंदगी अपडेटेड हुई है , मगर Contraceptive को ले कर उनकी जानकारियां काफी नहीं हैं । उलटे उनके मन में इसे ले कर कुछ मिथ हैं। ज्यादातर युवा महिलाएं बच्चे जल्दी नहीं चाहतीं। कॉन्ट्रासेप्टिव की सही जानकारी ना होने से अनचाही pregnancy  हो जाती है और वे इमरजेंसी ‘ Pills or abortion का सहारा लेती हैं। इसके साइड इफेक्ट भी झेलने पड़ते हैं। और आज के इस ब्लॉग में हम इसी बारे में जानेगे, आज मं आप को गर्भनिरोधकों (contraceptives meaning in hindi) पर सही जानकारी दूगी तो चलिए फिर जानते है:Unwanted Pregnancy Pills

Contraceptives or women:

अनचाही प्रेगनेंसी की परेशानी से बचने और बच्चों के जन्म के बीच कुछ सालों का फासला रखने के लिए महिलाएं ऐसा उपाय चाहती हैं , जिसके लिए किसी पर निर्भर ना रहना पड़े। वे ऐसा कॉन्ट्रासेप्टिव चाहती हैं , जो सहजता से उपलब्ध हो। उनके लिए कई तरह के गर्भ निरोध के साधन उपलब्ध भी हैं मसलन contraceptive pills, इन्जेक्टेबल , कंडोम और copper-t। वे अपनी पसंद और सुविधा के हिसाब से कॉन्ट्रासेप्टिव चुनती हैं । लेकिन यदि एक सही सलाह की बात की जाये तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिल कर कॉन्ट्रासेप्टिव चुनना बेहतर रहता है।

लोकप्रिय पाठ:

कॉन्ट्रासेप्टिव तभी लाभदायक हैं, जब इनके इस्तेमाल के बारे में अच्छी तरह मालूम हो । अगर कॉन्ट्रासेप्टिव के बारे में ठीक से । जानकारी नहीं है , तो अनचाही प्रेगनेंसी होने के अलावा असुरक्षित एबॉर्शन का खतरा भी रहता है । जरूरी है कि महिलाओं को इस विषय पर पूरी जानकारी मिले और उनके मन में जो संदेह हैं , उनका हल ढूंढा जाए । तभी वे अपना स्वस्थ और तनावरहित सेक्स जीवन एंजॉय कर पाएंगी|

कॉन्द्रासैटिव गोलियां/Unwanted pregnancy medicine:

कॉन्ट्रासेप्टिव गोलियां आसानी से मिल जाती हैं । ये हारमोन पिल्स हैं , | जिन्हें रोज लेना होता है । इनमें इस्ट्रोजन व प्रोजेस्ट्रॉन हारमोन्स होते हैं । ये जनहिलाओं के हारमोन के स्तर को कंट्रोल करती हैं । जो महिलाएं प्रेगनेंसी नहीं चाहतीं पर जिनकी एक्टिव सेक्स लाइफ है , तो उनके लिए गर्भनिरोध का यह एक बेहतरीन विकल्प है। ‘ गर्भनिरोधक गोलियां भरोसेमंद भी साबित होती हैं। गर्भनिरोधक गोलियों में सिंथेटिक हारमोन्स होते हैं । ये हारमोन्स हर महीने ओवरीज से एग को रिलीज होने से रोकते हैं। अगर ये गोलियां एकदम समय से और सही तरीके से ली जाए, तो 99 प्रतिशत असरदायक रहती हैं।

इन्हें पीरियड्स के पहले या पांचवें दिन से उपयोग में लाया जाता है। इन गोलियों को नियमित रूप से रोज लिया जाता है , तभी कारगर रहती हैं । सामान्य रूप से पीरियड्स के पहले दिन से रोज एक गोली निश्चित वक्त पर रात के खाने के बाद या सुबह नाश्ते के बाद ली जानी चाहिए । यदि टाइम से गोली लेना भूल गयी हैं , तो जैसे ही याद आए तुरंत गोली लें । यदि 12 घंटे से अधिक समय के बाद गोली लेना याद आए , तो तुरंत अगले सप्ताह तक इस चक्र को दोबारा शुरू करें । अगर 2 या इससे अधिक दिन गोलियां लेना भूल गयी हैं, तो कॉन्ट्रासेप्शन का कोई दूसरा माध्यम चुनें और प्रेगनेंसी टेस्ट भी करा लें ।

प्रेगनेंसी रोकने के लिए टेबलेट:

unwanted pregnancy  रोकने के लिए 21 गोलियों के पैक से रोज एक गोली हर रात या सुबह 3 सप्ताह तक लें। और उनके खत्म होते ही एक हफ्ते बाद गोलियों का नया पैक शुरू करें। ‘ बाजार में कई तरह की गर्भनिरोधक गोलियां मिलती हैं , जिनमें हारमोन्स का कॉम्बिनेशन अलग – अलग होता है। 28 गोलियों के पैक में पहले 3 हफ्ते तक ली जानेवाली 21 गोलियों में हारमोन्स होते हैं, पर इसके बाद ली जाने वाली एक हफ्ते की गोलियों में कोई हारमोन नहीं, हल्के – फुल्के विटामिन होते हैं। 21 दिनों के बाद की गोलियां इसलिए होती हैं , ताकि रोज गोली लेने की आदत बनी रहे। चौथे हफ्ते गोलियां लेते समय तक माहवारी डेट पर आ जानी चाहिए । ‘

अगर नियमों का पूरी तरह पालन करने पर भी पीरियड्स मिस हो जाएं तो अगली माहवारी तक गोलियां लेती रहें । यदि 2 महीने तक पीरियड्स ना आएं , तो प्रेगनेंसी टेस्ट कराएं । गर्भनिरोधक गोलियां ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं को नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इससे दूध बनना कम हो जाता है। लेकिन वे ऐसी गर्भनिरोधक गोलियां ले सकती हैं , जो केवल प्रोजेस्ट्रॉन से बनी होती हैं । वेस्ट फीड कराने वाली मांओं के लिए ये गोलियां शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है । ध्यान रहे कि ये गर्भनिरोधक गोलियां महिला का एसटीडी यानी सेक्सुअल टांसमिटेड डिजीज के इन्फेक्शन से कोई बचाव नहीं करतीं ।

जिन महिलाओं को गोलियां लेने से मिचली आती है , वे नाश्ते के साथ या रात में बिस्तर में जाने से पहले गोली लें। अगर एंटीबायोटिक्स या एंटी व्यवरक्यलोसिस दवाएं ले रही हैं , तो उनसे कॉन्ट्रासेप्टिव गोलियों का असर कम होता है । इसलिए उस बीच दूसरे तरीके आजमा सकती हैं । इन महिलाओं ‘ को डॉक्टरी सलाह के अनुसार कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेनी चाहिए ।

unwanted pregnancy solution in hindi

इमरजेंसी पिलस/गर्भ निरोधक उपाय:

 हारमोनल पिल्स में इमरजेंसी पिल्स भी शामिल हैं । ये असुरक्षित सेक्स संबंध के 7 घंटों के अंदर ली जानी चाहिए । इनको ‘ मॉर्निग आफ्टर पिल्स ’ भी कहते हैं । इस गोली को डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही लेना ठीक रहता है । यह सामान्य हारमोनल गोलियों की हाई डोज है । इनका प्रयोग असुरक्षित संबंध के बाद प्रेगनेंसी से बचने के लिए किया जा सकता है । ये ई पिल व आई पिल के नाम से मिलती हैं । यह दो गोलियों का पैक है, जो बिना कोई ‘ कॉन्ट्रासेप्टिव के इस्तेमाल से बने संबंध के 72 घंटे के अंदर लेनी चाहिए । ये गौलियां कंडोम फटने या कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेना भूल जाने की स्थिति में लेने से प्रेगनेंसी टालने में मददगार रहती हैं । पहली गोली लेने के 12 घंटे बाद दूसरी गोली लेनी होती है । यदि पहली ‘ गोली खाने के 2 घंटे के अंदर उल्टी हो जाए, तो एक और गोली तुरंत लें । ये दूसरी गर्भनिरोध की गोलियों से अलग होती हैं। इनका सॉल्ट अलग होता है । इनको 1 – 1 करके 12 घंटे के अंतराल में लिया जा सकता है और 2 गोलियां एक साथ भी ली जा सकती हैं। कई बार इमरजेंसी पिल्स लेने में अनियमित ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है । इन गोलियों को कॉन्ट्रासेप्टि पिल्स की तरह नहीं लिया जा सकता । बार – बार इन्हें खाने से पीरियड्स प्रभावित होते हैं और भविष्य में प्रेगनेंसी में रुकावट पैदा हो जाती है । हारमोनल असंतुलन से चेहरे पर बाल भी आ सकते हैं ।

आपसी विमर्श:

फैमिली प्लानिंग के कई तरीके हैं । दंपती अपनी सुविधा के हिसाब से ही परिवार नियोजन का कोई तरीका अपनाते हैं । बेहतर रहेगा कि पति – पत्नी दोनों ही पहले किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिल कर इस बारे में राय ले कर सही कॉन्ट्रासेप्टिव का चुनाव व इस्तेमाल करें ।

ध्यान रखें हमेशा ऐसा कॉन्ट्रासेप्टिव चुनें , जिसके उपयोग करने पर प्रेगनेंसी की कोई आशंका ना हो । डॉक्टर से मिल कर पहले पता कर लें कि वह कॉन्ट्रासेप्टिव सेफ है या नहीं । क्या उसके कोई साइड इफेक्ट्स भी हैं ? कहीं उसे लेने से ब्रेस्ट फीडिंग पर कोई गलत असर तो नहीं पड़ता ? कहीं उसका उपयोग करने के बाद भविष्य में प्रेगनेंसी पर बुरा असर तो नहीं पड़ेगा ? जिन महिलाओं के पीरियड्स नियमित नहीं हैं या जो रीपोडक्टिव ट्रैक इन्फेक्शन की शिकार हैं, उनके लिए कौन सा टासेप्टिव चुनना उचित रहेगा? यह सब पहले जान लेना हमेशा महिला के ‘ स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहता है ।

कॉन्ट्रासेटित वैराइटी प्राकृतिक तरीका/ contraceptive pills uses:

आज भी कई दंपती प्राकृतिक तरीका अपनाते हैं । यह प्राकृतिक पद्धति के सिद्धांत पर आधारित है , जिसमें महिला महीने के सबसे फर्टाइल पीरियड में सेक्स से दूर रहे । चूंकि महिला का सामान्य माहवारी चक्र 28 दिनों का होता है , पर उसके 14 दिन पहले अंडा बनता है । उन दिनों संबंध से परहेज रखने से प्रेगनेंसी की संभावना कम होती हैं, पर टलती नहीं हैं । पीरियड्स का क्रम गड़बड़ाने पर यह तरीका असफल हो सकता है । वहीं पुरुष विदड्रॉअल तरीका अपनाते हैं। इसमें स्त्री के संतुष्ट होने के बाद पुरुष खुद को संतुष्ट करे और बाहर स्खलित हो| दोनों ही तरीकों में प्रेगनेंसी की आशंका बनी रहती है , इसके बजाय दूसरे उपाय आजमाना अच्छा रहता है । पुराने हो चुके इन तरीकों से प्रेगनेंसी की संभावना बनी रहती है ।

इस दौरान आप को अपना खुश ख़ास ख्याल रखना चाहिए ताकि इन सब की वजह से आप की हेल्थ पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े जिसके लिए ज़रूरी है की महिलाये रोजन खुद को फिट रखे|

तो यह रही कॉन्ट्रासेप्टिव से जुडी कुछ बाटे जो हर महिला के लिए जानना बहुत ज़रूरी है, उम्मीद है इसे आप को आप की समस्या का समाधन मिला होगा| धन्यवाद||

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