जानें, क्या है तुलसी के पौधे का महत्व – Tulsi Ka Mahatva

tulsi ka mahatva

बचपन में अपने घर के आंगन में तुलसी चौरा जिसने भी देखा होगा, उन्हें बताने की जरूरत नहीं है कि इस छोटे से पौधे का हमारे जीवन में कितना महत्व है । हिंदू मान्यता के अनुसार , मां लक्ष्मी की अवतार तुलसी या विरिन्दा देवी भगवान विष्णु की अनन्य भक्त थी , इसीलिए विष्णु की पूजा में तुलसी दल यानी इसकी पत्तियां बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है ।

           भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में भी इसका बहुत महत्व है। आज भी सभी हिंदू परिवारों के घरों में तुलसी का पौधा पवित्रता के साथ आंगन या बालकनी में लगा होता है , जिसकी पूरे भक्ति भाव से जल अर्पण कर उसकी पूजा अर्चना की जाती है । तुलसी अपने औषधीय गुणों के कारण भी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है । सरदी – खांसी होने पर इसकी पत्तियों का काढ़ा हम सबने जरूर पिया होगा।

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तुलसी तेरे कितने रूप:

तुलसी की कई प्रजातियां होती हैं , जिनमें राम तुलसी और श्याम तुलसी प्रमुख हैं। हरी पत्तियोंवाली तुलसी राम तुलसी कहलाती हैं और गहरे हरे या बैंगनी रंग की पत्तियोंवाली तुलसी श्याम तुलसी या कृष्ण तुलसी के नाम से जानी जाती है । तुलसी को वैष्णवी, विष्ण वल्लभ, हरिप्रिया नामों से भी जाना जाता है । राम तुलसी भगवान विष्ण की पूजा में चढ़ायी जाती है, जबकि श्याम तुलसी को विष्णु के ही अवतार श्रीकृष्ण की पूजा में चढ़ाने की परंपरा है ।

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क्यों है तुलसी इतनी पवित्र व पूज्य :

सभी पेड़ – पौधों में सबसे पवित्र मानी जानेवाली तुलसी को हिंदू मान्यता के अनुसार धरती और स्वर्ग के बीच का सेगु माना जाता है। कहा जाता है कि इसकी शाखाओं में भगवान ब्रह्मा निवास करते हैं । सभी हिंदू तीर्थ इसकी जड़ों में स्थित हैं, गंगा इसकी जड़ों में बहती है और इसके तने व पत्तियों में सभी देवताओं का वास होता है । इसकी शाखाओं के ऊपरी भाग में पवित्र ग्रंथ वेदों का स्थान है। इसीलिए तुलसी के पौधे को सबसे पवित्र माना जाता है।

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तुलसी की पूजा क्यों :

मान्यता है कि जो भी व्यक्ति तुलसी में जल डालता है और इसका रखरखाव करता है , उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है । घर की स्त्रियां तुलसी की पूजा नियमित रूप से करती हैं, क्योंकि इसे मातृत्व और स्त्रीत्व का भी प्रतीक माना जाता है । तुलसी की पूजा के खास दिन मंगलवार और शुक्रवार हैं, रविवार को तुलसी को जल नहीं दिया जाता है। तुलसी के पौधे के पास दीपक जला कर रखने को भी शुभ मानते हैं । कार्तिक मास की प्रबोधिनी एकादशी को तुलसी विवाह की भी परंपरा है , जब तुलसी का विवाह विष्णु भगवान से कराया जाता है ।

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