दिवाली के 5 दिन का महत्व – दीपावली के पांच दिनों में क्या-क्या होता है

five days of diwali explained in hindi

खिर पूरे साल भर के इंतजार के बाद त्योहारों का मौसम ‘ आ ही गया। इन्हीं दिनों में युवतियां बहुत सारे अरमान पूरे करने का ख्वाब सजाती हैं । एक से बढ़ कर एक ड्रेसेज पहनना , बढ़िया मेकअप , लजीज खाना – पीना , घूमना फिरना , फैमिली – दोस्तों के साथ मस्ती सब कुछ त्योहार के दिनों में ही तो होता है ।

दीवाली

यानी दीपों का पर्व तो सबसे खास है , क्यों ना आप इसकी मस्ती के साथ थोड़ी इसकी पारंपरिक जानकारी से भी रूबरू हो लें ।

दीवाली अकेले नहीं आती, साथ में बेहतरीन 4 और त्योहार भी लाती है । धनतेरस से शुरू हो कर भैया दूज पर पूरा होने वाले 5 दिनों की इस विशेष त्योहार श्रृंखला पर एक नजर डालते हैं और फिर तैयारियों में जुट जाते हैं

पहला दिन ( कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयादशा , २५ अक्टूबर
धनतेरस – सौभाग्य दिवस

कहते हैं आज के दिन ही समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं , इसीलिए धनतेरस के दिन उनके स्वागत की तैयारियां की जाती हैं । महान वैद्य धनवन्तरि इसी दिन क्षीरसागर से अमृत कलश ले कर अवतरित हए थे । लंबी उम्र और सेहत के लिए उनकी पूजा की जाती है । सोने , चांदी या स्टील के बरतन खरीदना शुभ मानते हैं । रात में इस श्लोक का जाप करते हुए घर के मेन डोर पर आटे से बना यमदीप जलाएं

मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह ।
त्रयोदश्यां दीपदाना सूर्यजः पीचतामिव । ।

टूसरा हिन ( कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी , 26 अक्तूबर )
नरक चतुर्दशी – ज्ञान दिवस

तिल के तेल से मालिश करके नहाएं व यमदेव की पूजा करें । कहते हैं इससे यमराज प्रसन्न होंगे और व्यक्ति को नरक नहीं भोगना पड़ेगा । श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध किया था , इसीलिए इसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं । इस मंत्र का जाप करते हुए पूजन करें-

सीता लोष्ट सहायक्तः संकष्ट : दलान्वितः ।
हर पापमपामार्ग भाभ्यमाण पुनः पुनः । ।

diwali 2019

तीसरा दिन ( कार्तिक अमावस्या , 27 अक्तूबर )
दीपावली – पूर्व रोशनी का

नारसो मा ज्योतिर्गमय . . . अंधकार चाहे बाहरी दुनिया का हो या मन का , दीवाली के दिन सब कुछ रोशन हो जाता है । पिछले 2 दिनों से चल रहे पूजा – पाठ , त्योहार की उमंग दीपावली के दिन चरम पर होती है । घर की साज – सज्जा के अलावा शामा के समय विधिपूर्वक मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है , ताकि सालभर लक्ष्मी की कृपा घर में बनी रहे ।

पितर मार्ग से भटक ना जाएं , इसके लिए इस रात कंदील भी जलाने की प्रथा है। इसी दिन असत्य पर सत्य की विजय हुड थी , जिसकी खुशी में लोगों ने अपने घरों को दीपमालाओं से सजाया था । श्रीवत पुराण के अनुसार दीवाली की आधी रात में मां लक्ष्मी रोशन , सुसज्जित बने आती हैं । घर में धन – धान्य कभी कम ना हो , इसके लिए दीवाली की रात में पर जलाते समय इस श्लोक का जाप करें

शुभम् करोति कल्याणम् आरोग्यं धन संपदा
शत्रु वृद्धि विनाशायः दीप ज्योति नमोऽस्तुते ॥

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चौथा दिन ( कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा , 28 अक्तूबर )
अन्नकूट / गोवर्धन पूजा – प्रेरणादायी दिवस

यह दिन विक्रम संवत कैलेंडर के नए साल के पहले दिन के रूप में भी मनाया जाता है । ब्रज के निवासियों के प्रमुख त्योहार अन्नकूट पर भगवान कृष्ण को नए अन्न से बने छप्पन प्रकार के पकवान – मिष्ठान्न का भोग लगाया जाता है । भागवत पुराण के अनुसार , श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठा कर वृंदावन के वासियों को 7 दिनों तक भारी वर्षा से बचाया था ।

इंद्र देवता ने क्रोधित हो कर यह वर्षा करायों थी , क्योंकि वहां के लोग उनके बजाय गोवर्धन पर्वत और कृष्ण की भक्ति करने लगे थे । इस दिन लोग गाय के गोबर से गोवर्धन पहाड़ बनाते हैं और पूजा करते है । यह पूजा पशुओं की संख्या और अन्न भंडार में बढ़ोतरी के लिए की जाती है।

पांचवां दिन ( कार्तिक शुक्ल द्वितीया , 29 अक्तूबर )
भैया दूज – बहन – भाई सौहार्द दिवस-

पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन यमुना ने अपने भाई यम को घर बुला कर आदरपूर्वक खाना खिलाया था , इसी से इसे यम द्वितीया भी कहते हैं । यमराज ने खुश हो कर वरदान दिया कि जो यमुना में नहा कर यम की पूजा करेगा , उसे यमलोक नहीं जाना पड़ेगा । आज यह त्योहार भाई – बहन के पवित्र व निस्वार्थ प्रेम के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है ।

बहनें भाई की पूजा करती हैं और उनकी लंबी उम्र और संपन्न होने की कामना करती हैं । इस दिन गोधन भी कूटा जाता है । गोबर से मनुष्य की आकृति बना कर उसके सीने पर ईंट रख कर मूसल से उसे तोड़ती हैं और कथा सुनती हैं । इसके बाद भाई को खाना खिलाती हैं और भाई अपनी शक्ति के अनुसार बहन को उपहार देते हैं । इसी दिन कायस्थ समुदाय द्वारा जान और बुद्धि पाने के लिए न्याय देवता चित्रगुप्त की पूजा भी की जाती है । माना जाता है कि चित्रगुप्त यमराज के दरबार में तीनों लोकों के प्राणियों के पाप – पुण्य का सारा लेखाजोखा रखते हैं ।

तो यह रहे सभी दिनों के हिसाब से त्योहारों से जुडी छोटी छोटी जानकारी, मैं उम्मीद करती हु की आप को यह ब्लॉग अच्छा लगता होगा. अगर आप को अच्छा लगा हो तो इस पोस्ट को शेयर ज़रूर साझा करे||

One thought on “दिवाली के 5 दिन का महत्व – दीपावली के पांच दिनों में क्या-क्या होता है

  • October 17, 2019 at 6:12 pm
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    Best information
    Nice blog
    Thanks you

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