दिवाली पूजा करने की विधि और इसके लिए किन चीजों की आवश्कता होती है?
माता लक्ष्मी धन, वैभव व शक्ति की देवी मानी जाती हैं । वे दरिद्रता को अपने सम्मुख नहीं आने देती। इसलिए दीवाली से कुछ हफ्ते पहले से ही घर की साफ – सफाई शुरू हो जाती है । गंदगी ( दरिद्रता ) का कहीं नामोनिशान नहीं रहने पाता है । Diwali “दीवाली की पूजा” में सबसे पहले एक चौकी पर सफेद वस्त्र बिछा कर उस पर मां लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा को विराजमान करें। बाद में इसी तरह से स्वयं को तथा अपने पूजा के आसन को भी इसी तरह जल छिड़ककर पवित्र कर लें।
दीवाली पूजा विशेष-
• देवी लक्ष्मी के साथ गणेश जी व देवी सरस्वती की पूजा का भी महातम्य है । सरस्वती देवी ज्ञान की व गणेश जी बुद्धि के दाता हैं । बिना ज्ञान और बुद्धि के लक्ष्मी की प्राप्ति नहीं हो सकती है ।
• हमारे देश में ही लक्ष्मी पूजन के कई तरीके हैं । गुजरात में दीवाली के दिन नमक खरीदना शुभ माना जाता है । उसी नमक से दीवाली का भोग बनता है ।
• उत्तर प्रदेश में दीवाली के दिन नयी झाडू खरीदी जाती है । उसकी पूजा करके उसी से घर की सफाई की जाती है । झाडू को शुभ मानते हैं और पैर नहीं लगाते हैं । इसे लिटा बहुपा कर रखा जाता है । मान्यता है कि झाड़ से दरिद्रता दूर होती है । .
“मैं धनतेरस के दिन सामान खरीदने बाजार गयी , तो सारा बाजार सजा हुआ मिला । कार से ले कर मिट्टी के दीए तक बिक रहे थे । घर का सामान और खील – बताशे खरीदने के बाद मिट्टी के दीयों व हटरी – चौकड़े की दुकान पर पहुंची , तो जींस – टॉप पहने एक युवती लक्ष्मी – गणेश की प्रतिमा खरीद रही थी । मुझे हटरी – चौकड़े , दीए आदि खरीदते देख कर पूछने लगी कि ‘ दीदी आप मड हाउस और यह 4 जॉइंट कटोरीज क्यों खरीद रही हैं । मैंने उसे बताया कि यह मड हाउस नहीं है , यह मेरे व तुम्हारे घर का प्रतीक है । यह चौकड़ा मेरे व तुम्हारे घर के भंडार का प्रतीक है । हम इनकी भी पूजा करते हैं और एक दीया पड़ोसी मुहर पर रखते है।”
माता लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं कि हमारे चौकड़े / भंडार के चारों कोने भरे रहें । अनाज की कभी कमी ना हो । हमारे घर ( हटरी ) पर सदा उनकी कृपा बनी रहे । हम घर में आपका स्वागत करते हैं । .हटरी – चौकड़ों में खोल – बताशे , मेवा , मिठाई , कुछ सिक्के भर कर पूजा में रखते हैं ।
दीवाली की पूजा में किन चीजों की आवश्कता होती है –
पूजा के लिए एक कलश ( मिट्टी , पीतल , तांबा , चांदी किसी का भी ) , खोल – बताशे , मोठे खिलौने , लक्ष्मी , गणेश व सरस्वती जी के चित्र व प्रतिमाएं व हनुमान जी की प्रतिमा , मिट्टी के दीए , चौमुखा दीया , रुई आदि सब लिए । साथ में पान , सुपारी , फूल , माला , रोली , चावल , वंदनवार आदि भी खरीदें ।
• दीपक जलाने का काम धनतेरस से ही शुरू हो जाता है । दीपक जला कर रसोई घर , पूजा घर , मुख्य द्वार , तुलसी चौरा और आंगन / बालकनी में रखे जाते हैं ।
अगले दिन चौदस पर भी 6-7 दीए जलाए जाते हैं । द्वार पर तो 2 दौए ‘ यम दीए ‘ के नाम से रखे जाते हैं । ये मिट्टी के टिमटिमाते दीए नहीं है, बल्कि! अंधकार से लड़ने के लिए सूर्य और चंद्रमा के प्रतिनिधि है ।
लक्ष्मी पूजा के दीए तेल से जलाए जाते हैं । मिट्टी का चार मुखवाला ‘ चौमुखा दीया ‘ भी जलाया जाता है । या दीया 3 दिन तक दिन – रात जलता है । इतना कर पाना संभव ना हो , तो कम से कम एक रात के लिए तो दीया जरूर जलाएं । ऐसी मान्यात है कि रोशनीवाले घर में ही लक्ष्मी आती है ।
दिवाली कब है (When is Diwali 2021)-
दीवाली (Diwali 2021) या लक्ष्मी पूजा (Diwali Laxami Puja 2021) के दिन, हिन्दु अपने घरों और दुकानों को गेंदे के फूल की लड़ियों व अशोक, आम तथा केले के पत्तों से सजाते हैं. इस दिन कलश में नारियल स्थापित कर, उसे घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर रखने को शुभ माना जाता है. इस साल दीवाली 4 नवंबर 2021 को गुरुवार के दिन मनाई जाएगी.
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तो यह रही दिवाली से संबंधित कुछ जानकारिया जो की मुझे उम्मीद है आप के लिए फायदेमंद रही होगी आप के लिए इनकी क्या विशेषता है आप मुझे कमेंट में ज़रूर बताये साथ ही इन बातो को अपने परोवर के साथ भी शेयर kare। आप सब को मेरी तरफ से दिवाली की हार्दिक शुभकाइसके साथ साथ इस ब्लॉग को शेयर ज़रूर करे। और हमारे इंस्टाग्राम पर हमें फॉलो भी करेमनाएं। 🙂