महालक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त कब है और लक्ष्मी पूजन की तैयारी कैसे करें

महालक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त कब है और लक्ष्मी पूजन की तैयारी कैसे करें
हिंदू धर्म में दिवाली का बहुत अधिक महत्व होता है। दिवाली के पावन पर्व की शुरुआत धनतेरस से हो जाती है। धनतेरस से भैय्या दूज तक दिवाली की धूम रहती है। कार्तिक मास की अमावस्या के दिन महालक्ष्मी पूजा होती है। इस दिन विधि- विधान से भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा- अर्चना की जाती है। माता लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है। मां लक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति के सभी दुख- दर्द दूर हो जाते हैं और जीवन सुखमय हो जाता है। आइए जानते हैं महालक्ष्मी पूजा डेट, शुभ मुहूर्त..

महालक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त-

अमावस्या तिथि प्रारम्भ: नवंबर 04, 2021 को प्रात: 06:03 बजे से। अमावस्या तिथि समाप्त: नवंबर 05, 2021 को प्रात: 02:44 बजे। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन मुहूर्त शाम 06 बजकर 09 मिनट से रात 08 बजकर 20 मिनट तक है। पूजन अवधि 01 घंटे 55 मिनट की है|

कैसे करें लक्ष्मी पूजन की तैयारी-

दीपावली पर सबसे बड़ा काम होता है महालक्ष्मी पूजन की विधिवत तैयारी। यहां हम आपके लिए लाए हैं लक्ष्मी पूजन तैयारी की सरल लेकिन प्रामाणिक विधि। 
सबसे पहले चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां रखें उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे।
लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें।
पूजनकर्ता मूर्तियों के सामने की तरफ बैठें।
कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें।
नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक है।
दो बड़े दीपक रखें। एक घी का, दूसरा तेल का। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें व दूसरा मूर्तियों के चरणों में। एक दीपक गणेशजी के पास रखें।
मूर्तियों वाली चौकी के सामने छोटी चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं।
कलश की ओर एक मुट्ठी चावल से लाल वस्त्र पर नवग्रह की प्रतीक नौ ढेरियां बनाएं।
गणेशजी की ओर चावल की सोलह ढेरियां बनाएं। ये सोलह मातृका की प्रतीक हैं। नवग्रह व षोडश मातृका के बीच स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।
इसके बीच में सुपारी रखें व चारों कोनों पर चावल की ढेरी।
सबसे ऊपर बीचोंबीच ॐ लिखें। छोटी चौकी के सामने तीन थाली व जल भरकर कलश रखें।
थालियों की निम्नानुसार व्यवस्था करें- 1. ग्यारह दीपक, 2. खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर, कुंकुम, सुपारी, पान, 3. फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी-चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक।
अब विधि-विधान से पूजन करें।

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